Speek Sweetly | मधुर बोलिये ।

मधुर बोलें!!

 एक राजा  ने स्वप्न में देखा कि उसके सब दांत गिर गए हैं, प्रातः उसने दरबार में अपने एक सभासद से पूछा कि इस सपने का क्या फल होना चाहिए ? सभासद ने उत्तर दिया - सरकार, इस स्वप्न का फल यह होगा कि आपके समस्त परिजन आपके जीवन काल में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे।  राजा ने उसका सिर धड़ से अलग करवा दिया,  फिर उसने वही प्रश्न एक अन्य सभासद से किया,  सरकार, आप अपने समस्त परिजन की अपेक्षा  दीर्घायु होंगे।  उसने अत्यंत विनम्रता पूर्वक उत्तर दिया। राजा ने उसको भारी इनाम दिया।
दोनों सभासदों का मतलब एक ही था,  परंतु उसको प्रस्तुत करने के ढंग  अलग अलग थें,  एक में कटुता थी और दूसरे में मधुरता थी, उसके परिणाम भी कटु व मधुर रहें।

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Speek Sweetly | मधुर बोलिये ।

इसी से कहते हैं कि वाणी का उपयोग इस प्रकार करो कि सुनने वाले को बुरा ना लगे किसी प्रकार का दुख  न पहुंचे हमेशा प्रिय और सत्य बोलना चाहिए अनुकूल वाणी पूरे सृष्टि को अपना मित्र बना सकती है प्रतिकूल वाणी अकारण ही शत्रु तैयार  कर सकती है कहा भी जाता है कि -
कागा काको धन हरै, कोयल काकौ देय?
मीठी वाणी बोल के,  जग अपनौ कर लेय।
कौवा और कोयल के रंग समान होते हैं परंतु कोयल की कूक सबको अच्छी लगती है और कौवे का कांव-कांव कोई सुनना नहीं चाहता। ना कोयल किसी को कुछ सौंप देती है ना कौवा किसी का कुछ हरण कर लेता है  केवल वाणी वेद का चमत्कार है । इसी प्रकार मनुष्य भी बाहर से समान रूप रंग के दिखाई देते हैं परंतु मधुर वाणी बोलने वाला सब के दिल में जगह बना लेता है और अप्रिय वाणी बोलने वाला व्यक्ति परहेज की चीज बन जाता है, एक को लोग मीठे गुड़ की भांति ग्रहण करते हैं, और दूसरे को कड़वे नीम की तरह थूक देते हैं।

 अनुकूल और मधुर वाणी सबको अच्छी लगती है  लोक प्रचलित कहावत भी है कि हम गुड़ ना दे  पर गुड़ जैसी बातें तो कहें। आप मिठे एवं हितकारी वाणी का अभ्यास करके देखें आपके संपर्क में आने वाले व्यक्ति तो प्रसन्न होंगे ही आपको भी उसके द्वारा आनंद की प्राप्ति होगी। संत कबीर दास का कथन प्रमाण है -
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
 औरन को शीतल करै, आपहु शीतल होय।।
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