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संस्कृत श्लोक जो जीवन में नया प्रकाश कर दे (हिंदी अर्थ सहित)

प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक (हिंदी अर्थ सहित) | Sanskrit Slokas With Meaning in Hindi

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षड् दोषा: पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता।
निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता।।

अर्थ :  वैभव और उन्नति चाहने वाले पुरुष को ये छः दोषो का त्याग कर देना चाहिए : नींद, तन्द्रा (ऊंघना), डर, क्रोध, आलस्य तथा  दीर्घ शत्रुता (कम समय लगने वाले कार्यो में अधिक समय नष्ट करना)

उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः।
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्।।

अर्थ : उधम (जोखिम लेने वाला व्यक्ति), साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम - यह 6 गुण जिस भी व्यक्ति के पास होते हैं, भगवान भी  उसकी मदद करते हैं।



किन्नु हित्वा प्रियो भवति। किन्नु हित्वा न सोचति।।
किन्नु हित्वा अर्थवान् भवति। किन्नु हित्वा सुखी भवेत्।।

अर्थ : मनुष्य किस चीज को छोड़कर प्रिय होता है? कौन सी चीज किसी का हित नहीं सोचती? किस चीज को त्याग कर व्यक्ति धनवान होता है? तथा किस चीज को त्याग कर सुखी होता है?

मानं हित्वा प्रियो भवति। क्रोधं हित्वा न सोचति।।
कामं हित्वा अर्थवान् भवति। लोभं हित्वा सुखी भवेत्।।

अर्थ : अहंकार को त्याग कर मनुष्य प्रिय होता है, क्रोध ऐसी चीज है जो किसी का हित नहीं सोचती। कामेच्छा को त्याग कर व्यक्ति धनवान होता है तथा लोभ को त्याग कर व्यक्ति सुखी होता है।



आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।।
नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ।।

अर्थ : मनुष्य  के शरीर में स्थित आलस्य ही मनुष्य का सबसे महान शत्रु  होता है, तथा परिश्रम जैसा कोई मित्र नहीं होता, क्योंकि परिश्रम करने वाला  व्यक्ति कभी दुखी नहीं होता, तथा आलस्य करने वाला व्यक्ति सदैव दुखी रहता है।

अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम् ।।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।।

अर्थ : "यह अपना है", "वह पराया है" ऐसी सोच छोटे ह्रदय वाले लोगों की होती है इसके विपरीत बड़े ह्रदय वाले लोगों के लिए सम्पूर्ण धरती ही उनके परिवार के समान होती है

Motivatinal Quotes In Hindi


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15 Comments

  1. प्रेरणादायक संस्कृत श्लोकों के लिए आभार।

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  2. बहुत सुंदर यूं ही ज्ञान का प्रकाश से उज्जवल करते रहिए

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  3. Pl let me know hindi meaning of sloka" maa nikhad pratishthana magmah sarswati sama yadkronch mithuna delam abdhih kam mohitam"

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    1. This is the first slok by Valmiki rishi after that Valimiki rishi wrote Ramayan .

      मा निषाद प्रतिष्ठांत्वमगमः शाश्वतीः समाः।
      यत् क्रौंचमिथुनादेकं वधीः काममोहितम्।।
      अर्थात्, हे निषाद! तुझे निरंतर कभी शांति न मिले। तूने इस क्रौंच के जोड़े में से एक की जो काम से मोहित हो रहा था, बिना किसी अपराध के हत्या कर डाली।

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  4. Dear team, it's very good to publish slokas people will learn to run in good path.

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  5. Very good,

    EXCELLENT 😮👍👍👍👍👍👏👏👏👏👏👏👏👏

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  6. Wah! iss ka to koi😮 javab hi nahi 😮👍👏👏👏👏👏👏🙂

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  7. अपनी संस्कृति से मिलवाने के लिए धन्यवाद

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    1. हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है प्रिय ।

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